Sunday, August 9, 2020

छात्र छात्राओं का विदाई समारोह

ले लो अंतिम बार विदा यह अंतिम मिलन हमारा है
तुम भी जानो मैं भी जानूँ यह शिक्षक ऋणी तुम्हारा है।



छात्र छात्राओं की शिक्षा पूरी होने पर जब विदाई समारोह का आयोजन किया जाता है तो उसमें छात्रों छात्राओं और टीचर के बीच जो प्रेम होता है वह उन्हें दूर नहीं जाने देना चाहता है किंतु अपना कर्तव्य निभाते हुए गुरु अपने विद्यार्थियों को उनके जीवन की मंगलकामनाओं के साथ अपने दर्द को छुपा कर उनको विदा करता है और विद्यार्थी भी अपने दर्द छुपाते हुए विदा होते है। यह ऐसा समय होता है कि जो हृदय को विदीर्ण कर देता है। बहुत असहनीय दर्द होती है परन्तु लोग अपना अपना कर्तव्य निभाने निकल पड़ते हैं।
इस समारोह पर कुछ पंक्तिया और कविताएं लिख रहा हूँ जो वास्तव में प्रेरक हैं----


हर्ष की आई है यह अनोखी घड़ी
दिन उमंगों तरंगों से भरपूर है,
पर बिछड़ने का समय भी है साथ में
मन यही सोच कर के विकल चूर है।

जिंदगी का ये कैसा नियम साथियों
मिल के सबसे बिछड़ना तो पड़ता ही है,
फूल को भी महकते गमकते हुए
खिल के एक दिन बिछड़ना तो पड़ता ही है।

उड़ के छू लो गगन की बुलंदी को तुम
हौसलों के परों को नई धार दो,
लक्ष्य की प्राथमिकता हमेशा दीजै
स्वप्न को सत्य करने में सब वार दो।

वक्ष में भर के प्रतिपल नए आरजू
नित हृदय की तरंगित रवानी लिखो,
अपने साहस लगन व परिश्रम से तुम
खुद सफलता की स्वर्णिम कहानी लिखो।

स्वेद कण श्रम के रत्नों सी आभा लिए
तुम सभी के मुखों पर चमकते रहें,
वक्त की धूल से तुम ये धूमिल न हो
आप सब सर्वदा यूँ दमकते रहें।

अपनी आभा से तुम अपनी प्रतिभा से तुम
जग को ज्ञान औ कला का नया दान दो,
विश्व में गर्व से शीश अपना उठे 
देश को अपने दम से तुम नये मान दो।

मातृ भाषा को तुम मातृ भूमि को तुम
अपनी जननी के ही सम समझते रहो,
शौर्य से धैर्य से तुम विभूषित रहो
पर विनय शील बन के महकते रहो।

कीर्ति का ध्वज तुम्हारा लहरता रहे
अपने कर्मों से जग में प्रकाशित रहो,
तुमको देखें तो हमको सदा गर्व हो
ऐसे उज्ज्वल बनो नित सुआसित रहो।




सफलता जिस ताले में बंद रहती है वह दो चाभियों से खुलती है वह है कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प ।

जिसके मन में भाव सच्चा होता है उसका हर काम अच्छा होता है।

इतने छोटे बनिये की हर कोई आपके साथ बैठे और इतने बड़े बनिये की जब आप उठें तो कोई बैठा न रहे।

किसी को शिखर पर पहुँचने के लिए ताकत की जरूरत होती है चाहे वह माउण्ट एवरेस्ट हो या आपका पेशा।




मत समझो अकेले हैं कुछ कर दिखाने में एक दीया काफी है अंधियारे को दूर भगाने में।

जो अपनी चमक परायी रोशनी में खोती है जुगनू की औलाद ऐसी ही होती है।

कायरता जिस चेहरे पर श्रृंगार करती है उस पर मक्खी भी बैठने से इनकार करती है।

अपने मन में डर का कोई बीज न बोने देना
स्वयं सजोया सपना भी हरगिज मत खोने देना
लक्ष्य तुम्हारे चरण चूमने चल कर खुद आयेगा
शर्त एक है अपनी बस हिम्मत मत खोने देना।

मुरझाया चेहरा मत रखना तुमसे लोग कटेंगें
खिले हुए फूलों को ही दुनिया पसंद करती है।

समय तो लगता है शिखर पे जाने में
चींटी को चढ़ने में पक्षी को उड़ने में 
महल बनाने में घर सजाने में
समय तो लगता है शिखर पे जाने में।



फूलों के जैसा महकती रहो 
पक्षी के जैसा चहकती रहो
सूरज की भाँति चमकते रहो
तितली के जैसा उमड़ती रहो
माता पिता का आदर करो
सुंदर भावों को मन में भरो।



सूरज निकला मिटा अंधेरा 
देखो बच्चों हुआ सबेरा
आया मीठी हवा का फेरा 
चिड़ियों ने फिर छोड़ा बसेरा
जागो बच्चों अब मत सोओ
इतना सुन्दर समय न खोओ।



बहुत लिया खेल अब करें परीक्षा की तैयारी
पेन पेन्सिल रबर कटर हो सामग्री सारी।

है वक्त बड़ा अनमोल अब न इसे गंवाना है
कर के अच्छी तैयारी अच्छे अंक भी लाना है।

हो पढ़ने का टाइम टेबल जो भी पढें मन से पढ़ें
एक उत्तर याद हो जाये फिर अगले की ओर बढ़ें।

न पढ़ें ज्यादा देर वक्त पर आराम करें 
याद हो जाये उत्तर जो उसे लिखने का काम करें।

लिखने से बार बार उत्तर याद हो जाएगा
हो प्रश्न पत्र कैसा भी झट हल हो जाएगा।

ठंडे दिमाग से हर प्रश्न का दें जवाब
लिखें उत्तर वही जो कहती हो किताब।

पाकर प्रथम श्रेणी माँ बाप का रोशन नाम करो
गर्व हो विद्यार्थियों तुम पर जो कुछ ऐसा काम करो।



वो भी क्या दिन थे मम्मी की गोद और पापा के कंधे, न पैसे की सोच न लाइफ के फंडे, न कल की चिन्ता न फ्यूचर के सपने, और अब कल की है फिकर और अधूरे हैं सपने, मुड़कर देखा तो बहुत हैं अपने, मंजिलों को ढूढने तुम कहाँ खो गये, न जाने क्यों हम इतने बड़े हो गए।







अध्यापक-
"शिवम पटेल"
(रसायन विज्ञान)
ग्राम- ताजपुर, पोस्ट- रामपुर सकरवारी,
जनपद- अम्बेडकर नगर,
राज्य- उत्तर प्रदेश, पिन कोड- 224122


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