गणतंत्र दिवस के इस शुभ अवसर पर मैं "शिवम पटेल" सबसे पहले यहाँ पर उपस्थित आप सभी को सादर प्रणाम करता हूँ। आगे बढ़ने से पहले यह जानना आवश्यक है कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में क्यों मनाया जाता है?...
किसी ने क्या खूब कहा है --
गणतंत्र का मतलब होता है "जनता द्वारा जनता के लिए शासन"। 26 जनवरी सन 1950 को हमारा देश पूर्ण रूप से अंग्रेजों से स्वतन्त्र हो गया था क्योंकि इसी दिन भारतीय संविधान सभा की कमेटी के सदस्यों ने मिलकर अंग्रेजों के समक्ष अपना संविधान प्रस्तुत किया था। अंग्रेजों ने भारतीय नेताओं द्वारा अपना संविधान प्रस्तुत करने के लिए 3 वर्ष का समय दिया था कि यदि इतने समय के अंदर अपना संविधान प्रस्तुत कर देंगे कि कौन कौन से नियम कानून के तहत देश को चलाएंगे तो अंग्रेज भारत को पूरी तरह छोड़कर चले जाएंगे। इसको बनाने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष के रूम में डॉ भीमराव अंबेडकर जी को चुना गया। इन्होंने संविधान को अंग्रेजी भाषा में लिखने में बहुत बड़ा योगदान दिया था। इस कमेटी के सभी सदस्य अन्य देशों के संविधान से अच्छे - अच्छे विचारों और नियमों को खोज कर लाया और अपने संविधान में शामिल किया। सभी लोगों ने मिलकर इस अथक परिश्रम से 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन के अंदर भारतीय संविधान को तैयार कर लिया था और 26 जनवरी सन 1950 को भारत को मुक्त करवा लिया था। उस समय भारत के पूरे भू-भाग पर भारतीयों का हक हो गया और पूरे भारत पर भारतीय जनता को शासन करने का अधिकार प्राप्त हो गया। इसलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में पूरे हर्ष उल्लास के साथ देश भर में मनाया जाता है लेकिन इसके बावजूद भी भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में रियासतों के रूप में बंटा हुआ था जिसको बाद में "सरदार पटेल" जी ने शाम, दाम, दंड ,भेद आदि हथकंडे अपनाकर एकीकरण कर के भारत को गणराज्य बनाया और एक नये भारत का रूप दिया। इसीलिए सरदार वल्लभभाई पटेल जी को "लौह पुरुष और भारत का विस्मार्क" कहा जाता है।
गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर मैं "शिवम पटेल" इस देश के जो नव युवा हैं उनके विचारों को कुछ पंक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत करना चाहता हूँ जो इस प्रकार है- ध्यान से सुनियेगा और अच्छा लगे तो तालियाँ भी जरूर बजाइयेगा ---
मिल गयी अगर आज्ञा हमको
सारा इतिहास बदल देंगे
लाहौर सिंधु पेशावर और
इस्लामाबाद भी ले लेंगे।
मौके का यही इरादा है
अब बॉर्डर क्रॉस किया जाये
आतंकावाद के अड्डों का
अब डट कर नाश किया जाये।
बहुत हो चुका नियम उल्लंघन
बहुत हो चुका छिटपुट वार
बहुत हो चुकी शांति वार्ता
अब तो उठ जाए हथियार।
बहुत हो चुकी राजनीति
अब बहुत हुईं बातें व्यवहार
बस एक तमन्ना है अपनी
हो जाये जंग अब आर-पार।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर
भारत माता का वंदन है
जिसका कण-कण हीरा-मोती
हर धूल यहाँ की चंदन है।
भूपति अशोक की धर्म नीति
है जन्म भूमि यह शेरों की
सम्राट हर्ष का दान यज्ञ
इस मिट्टी का यश वर्णन है,
गणतंत्र दिवस के अवसर पर
भारत माता का वंदन है।
आजकल भ्रस्टाचार भारत सहित पूरे विश्व में अपना पाँव पसारे हुए है। इसपर मैं कुछ पंक्तियाँ बोल रहा हूँ --
भ्रस्ट कर्मचारी हैं जो अब
वे जनता को नोच ले रहे
अधिकारी निर्दय हो कर के
दीनो से उत्कोच ले रहे।
हो करके स्वच्छंद घूमते
जो हैं घूसखोर अधिकारी
रिश्वतखोरी आज देश की
है यह ला इलाज बीमारी।
क्रंदन करुण गुलाब कर रहा, कैसा है यह निज गुलिस्तां
मेरा भारत कितना महान, सौ में हैं नब्बे बेईमान।
राम राज की कल्पना मिली खाक में आज
गुंडे हैं मंत्री बने शासक हैं यमराज
शासक हैं यमराज राज करते हैं दानव
क्रन्दन करुण कर रहे पीड़ित होकर मानव
कहते "शिवम पटेल" समस्या यही आज की
करें कल्पना कैसे हम सब राम राज की।
भारत के गणतंत्र का सारे जग में मान
दशकों से है खिल रही इसकी अद्भुत शान
सब धर्मों को देकर मान रचा गया इतिहास
इसी लिए हर देशवासी का इसमें है विश्वास।
अब अन्त में चलते चलते भारत माँ के उन वीर सपूतों, नौ जवानों और सुरक्षा कर्मियों के सम्मान में कुछ सुनाते चलें जो देश और देश के लोगों की सेवा कर रहे है और सेवा करते करते शहीद भी हो जाते हैं। ध्यान से सुनियेगा -----
किसी महफ़िल की खुशबू को महकता छोड़ आया हूँ
मेरी नन्ही सी चिड़िया को चहकता छोड़ आया हूँ
मुझे छाती से अपनी तू लगा लेना ऐ भारत माँ
मैं अपनी माँ की बाहों को तरशता छोड़ आया हूँ।
लड़े जंग वीरों की तरह
जब खून खौल फौलाद हुआ
मरते दम तक डटे रहे वो
तभी तो देश आजाद हुआ।
कुछ नशा तिरंगे की आन का है
कुछ नशा तिरंगे की शान का है
हम लहरायेंगे हर जगह यह तिरंगा
नशा ये हिंदुस्तान के सम्मान का है।
भारत माता तेरी गाथा
सबसे ऊँची तेरी शान
तेरे आगे शीश झुकायें
दें तुझको हम सब सम्मान।
"जय हिन्द"
शिवम पटेल
ग्राम- ताजपुर
पोस्ट- रामपुर सकरवारी
जिला/जनपद- अम्बेडकर नगर
उत्तर प्रदेश, भारत
पिन कोड - 224122



