Thursday, December 14, 2023

सरदार पटेल जी पर कविता

 नमस्कार दोस्तों आज सरदार पटेल जी पर कविता बता रहे हैं. भारत के लौह पुरुष कहे जाने वाले पटेल के अथक प्रयासों से ही अखंड भारत का स्वरूप मिला था. 31 अक्टूबर 1875 को गुजराती परिवार में जन्मे पटेल के योगदान के कारण उनके जन्म दिवस को एकता दिवस के रूप में मनाया जाता हैं. यह तत्कालीन राजनीति का असर और देश का दुर्भाग्य ही समझा जाएगा कि उनको प्रधानमंत्री नहीं बनने दिया गया था।


 

सरदार पटेल पर कविता-

 

सरदार वल्लभ भाई पटेल जी आधुनिक भारत के निर्माता थे. वे एक दूरदर्शी, विद्वान्, कुशल राजनेता व कूटनीतिज्ञ के साथ ही सच्चे देशभक्त थे. स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण कर देश उन्हें सदैव याद रखेगा।


खंड खंड को जोड़ जिसने

अखंड राष्ट्र का सृजन किया

उन शिल्पी वल्लभ को सबने

लौहपुरुष कह नमन किया 




सत्य के अनुयायी थे वो

खेड़ा से रण में रखे कदम

भर हुंकार बारदौली में बोले

न दे लगान की रत्ती हम


वाणी में थी सिंह गर्जना

उर में थे अनुराग नरम

बढ़ी ख्याति अखिल हिन्द में

चूर किया सत्ता का भ्रम


अत्याचार के शासन का

दृढ होकर जिसने दमन किया

उन युग शिल्पी को सबने

लौहपुरुष कह नमन किया


सदियों से जो नहीं था हुआ,

चंद दिनों में सफल किया

पांच सौ पैसठ रजवाड़ों को

कूटनीति से विलय किया.





जूनागढ़ से जनमत लेकर

कश्मीर से सुलह किया

सबक सिखा करके निजाम को

हैदराबाद में समर किया.


इस्पात के ढाँचे की सेवा का

नए रूप में गठन किया

उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने

लौहपुरुष कह नमन किया.


 

साहस धैर्य की अनुपम दृष्टि

हिय में थे संजोय हुए

धरा से उठकर बने हिमालय

जिनकी गुरुता गगन छुए


अतुल त्याग की मूरत थे वे

लोभ न जिनके निकट गये

अखंड राष्ट्र एकता हेतु

तन मन धन से अर्पित भए


उर में धारण कर सेवा भाव

फिर कुरीतियों का दमन किया

उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने

लौहपुरुष कह नमन किया.





कायम रखने राष्ट्र एकता

उच्च पदों का त्याग किया

विजयी होकर लोभ क्रोध पर

देशहित का साथ दिया


दूरदर्शिता की शक्ति थी

चीन के प्रति चेताया था

अमर हुए जब ज्ञात तब

खुद को घर न बनाया था


धन्य हो गई धरा हिन्द की

जो भारत भू पर जन्म लिया

उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने

 लौहपुरुष  कह नमन किया.




 

खंड खंड को जोड़ के जिसने

अखंड राष्ट्र का सृजन किया

उन युग शिल्पी वल्लभ को सबने

लौहपुरुष  कह नमन किया।


जय सरदार 💪💪💪💪💪

Sunday, October 1, 2023

डॉ. आंबेडकर की शिक्षा पूरी कराने वाले महाराजा

 

भारत के वो महाराजा, जिसकी मदद से डॉ. आंबेडकर उच्च शिक्षा के लिए गए थे विदेश

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भीमराव आंबेडकर और महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ - फोटो : सोशल मीडिया
Abhinandankiduniya.blogspot.com 
भारत रत्न से नवाजित डॉ. भीमराव आंबेडकर का दलित समाज के उत्थान और उन्हें जागरुक करने में बहुत बड़ा योगदान है। बचपन से ही आर्थिक और सामाजिक भेदभाव से जूझते हुए विषम परिस्थितियों में डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपनी पढ़ाई शुरू की थी। जब डॉ. भीमराव आंबेडकर युवा थे, तो उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना था। ऐसे में उनके सामने आर्थिक संकट एक बहुत बड़ी समस्या थी।

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डॉ. भीमराव आंबेडकर - फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि युवा भीमराव आंबेडकर अपनी स्नातकोत्तर पढ़ाई कोलंबिया यूनिवर्सिटी से करना चाहते थे। उनके विदेश में पढ़ने के सपने को साकार करने के लिए एक महाराजा ने मदद की थी। हाल ही में करेंट अफेयर्स पर आधारित रियलिटी शो कौन बनेगा करोड़पति में हॉट सीट पर बैठे एक प्रतियोगी से यह सवाल पुछा गया था। हालांकि प्रतियोगी के लिए इस सवाल का जवाब आसान नहीं था और उसे एक्सपर्ट की मदद लेनी पड़ी। तो आइए जानते हैं उस महाराजा के बारे में, जिसने युवा अंबेडकर को विदेश जाने में मदद की थी।

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महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ तृतीय - फोटो : सोशल मीडिया

साल 1913 में अंबेडकर ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने के लिए बड़ौदा महाराजा के यहां आर्थिक मदद के लिए आवेदन दिया। बड़ौदा के तत्कालीन महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ तृतीय के पास जब आंबेडकर का आवेदन पहुंचा, तो उन्होंने इसे मंजूर कर सालाना स्कॉलरशिप देना शुरू कर दिया। इस स्कॉलरशिप की मदद से आंबेडकर के लिए विदेश जाकर पढ़ाई करना आसान हो गया।

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डॉ. भीमराव आंबेडकर - फोटो : सोशल मीडिया

युवा आंबेडकर जब विदेश से पढ़ाई कर वापस लौटे तो उन्हें बड़ौदा राज्य के लेजिस्लेटिव असेंबली का सदस्य बनाया गया। इसके साथ ही राज्य में एक कानून बनाया गया कि राज्य में अनुसूचित जाति के लोग भी चुनाव लड़ सकें। पिछड़े वर्ग, महिलाओं के साथ आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए बड़ौदा राज्य में चलाई जा रही योजनाओं का अंबेडकर पर भी असर पड़ा, जो संविधान निर्माण के दौरान नजर आया।

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महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ तृतीय - फोटो : सोशल मीडिया
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महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ तृतीय अपने राज्य में शिक्षा, कला, नृत्य आदि क्षेत्रों से जुड़ी बड़ी हस्तियों को संरक्षण देने में भी आगे रहते थे। ज्योतिबा फुले, दादाभाई नौरोजी, लोकमान्य तिलक, महर्षि अरविंद समेत कई हस्तियों को महाराजा सायाजीराव ने आर्थिक मदद दी। इसके साथ ही राज्य में लड़कियों के शिक्षा पर ध्यान देते हुए कई स्कूल खोले और प्राइमरी शिक्षा मुफ्त करने के साथ अनिवार्य कर दी।

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डॉ. भीमराव आंबेडकर - फोटो : सोशल मीडिया
महाराजा सायाजीराव गायकवाड़ तृतीय को भारतीय रियासतों के शासकों के बीच सबसे बड़ा समाज सुधारक और प्रगतिवादी राजा माना जाता है। बता दें कि उन दिनों शायद ही कोई राज्य ऐसा था, जहां वंचित वर्ग और पिछड़ों की इस तरह से मदद की जाती थी। महाराजा सायाजीराव का डॉ. आंबेडकर के साथ हमेशा अच्छे संबंध बने रहे। साल 1939 में महाराजा सायाजीराव का निधन हो गया।

Sunday, September 10, 2023

 G20 समिट के बहाने नई दिल्ली में तैयार हो गया चीन के BRI का सबसे बड़ा जवाब, यूरोप तक दिखेगी भारत की धमक



G-20 सम्मेलन के पहले दिन भारत ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर के निर्माण का ऐलान किया किया. इस प्रोजेक्ट में मध्य पूर्व और यूरोपीय देशों के अलावा अमेरिका भी अहम साझीदार है. इस कॉरिडोर को चीन के बीआरआई के जवाब के रूप में देखा जा रहा है. जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन शनिवार को एक ऐतिहासिक घोषणा की गई. सभी महाद्वीपों में आर्थिक एकीकरण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी द्वारा भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप इकोनॉमिक गलियारे (India Middle East Europe Economic Corridor- IMEC) के लॉन्च का ऐलान किया गया. इस पहल में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, यूरोपीय संघ, फ्रांस, इटली, जर्मनी और अमेरिका शामिल है.





सपनों के विस्तार के बीज बो रहे हैं- पीएम


पीएम मोदी ने बताया कि यह गलियारा 'भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच आर्थिक एकीकरण का प्रमुख माध्यम' होगा, जो वैश्विक कनेक्टिविटी और सतत विकास में एक नया अध्याय पेश करेगा. इस परियोजना द्वारा पेश की जाने वाली पर्याप्त संभावनाओं पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, 'मज़बूत कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर मानव सभ्यता के विकास का मूल आधार हैं. आज जब हम कनेक्टिविटी का इतना बड़ा इनिशिएटिव ले रहे हैं, तब हम आने वाली पीढ़ियों के सपनों के विस्तार के बीज बो रहे हैं.' यह परियोजना अपने दो मार्गों माध्यम से राष्ट्रों के बीच अधिक आर्थिक एकीकरण का मंच तैयार करती है, जिसमें शामिल हैं: पूर्वी गलियारा, जो भारत को अरब की खाड़ी से जोड़ता है और दूसरा है उत्तरी सिरा, जो अरब की खाड़ी को यूरोप से जोड़ेगा. वस्तुओं और सेवाओं की सुगम आवाजाही की सुविधा के लिए तैयार किए गए इस गलियारे में रेलवे और शिपिंग रूट होगा, जो डिजिटल और बिजली केबल नेटवर्क पर आधारित होगा. 



बाइडेन ने IMEC का महत्व समझाया


अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने आईएमईसी के वैश्विक महत्व पर जोर दिया. उन्होंने इसे 'एक बड़ी उपलब्धि' के रूप में पेश किया और 'आर्थिक गलियारा' शब्द के आगामी दशक में प्रमुखता से गूंजने की भविष्यवाणी की. उन्होंने अंगोला से हिंद महासागर तक फैली एक नई रेल लाइन में निवेश करके कनेक्टिविटी बढ़ाने की अमेरिकी प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला. बाइडेन ने विश्वास जताया कि यह परियोजना रोजगार पैदा करने और विश्व स्तर पर खाद्य सुरक्षा को बढ़ाने के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है.




चीन के BRI की काट है ये योजना!


G7 देशों द्वारा पोषित, पार्टनरशिप फॉर ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट (PGII) तहत स्थापित इस गलियारे का लक्ष्य चीन की बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) पहल का मजबूती से जवाब देना है. पीजीआईआई द्वारा समर्थित जी7 का सामूहिक प्रयास, उभरते देशों में बुनियादी ढांचे के विकास को आर्थिक मदद देने से भागीदार देशों के बीच व्यापार वृद्धि में महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादों के साथ वैश्विक आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे.


यूरोपीय संघ के अध्यक्ष, उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह गलियारा यात्रा के समय को 40% तक कम कर देगा. उन्होंने इसे 'भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच सबसे सीधा संबंध' बताया. इस बीच, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मो. बिन सलमान ने इस परिवर्तनकारी पहल के फलीभूत होने के प्रति उत्सुकता जाहिर की.




व्हाइट हाउस का बयान


व्हाइट हाउस ने इस परिकल्पित रेल बुनियादी ढांचे को मौजूदा समुद्री और सड़क आवागम नेटवर्क के पूरक के रूप में एक विश्वसनीय और लागत प्रभावी विकल्प बताया और कहा कि इससे वैश्विक व्यापार संभावनाओं में तेजी आएगी. भागीदार देशों ने आगामी 60 दिनों के भीतर एक कार्य योजना तैयार करने की प्रतिबद्धता जताते हुए इस ऐतिहासिक पहल को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.





संप्रभुता की अनिवार्यता को और अधिक रेखांकित करने के लिए, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और वैश्विक नेताओं ने सभी देशों की संप्रभुता के लिए सम्मान की आवश्यकता को दोहराया. यह स्पष्ट जोर चीन की विवादास्पद बेल्ट और रोड पहल को संतुलित करने की दिशा में साझा दृष्टिकोण का एक प्रमाण था.


 राष्ट्राध्यक्ष रहे शामिल


उच्च स्तरीय कार्यक्रम में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रॉ, जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन, इटली की प्रधान मंत्री जियोर्जिया मेलोनी और विश्व बैंक के प्रमुख अजय बंगा सहित वैश्विक नेता मौजूद रहे. यह विशाल गठबंधन इस परियोजना के वैश्विक महत्व को दर्शाता है और वैश्विक सहमति और साझा दृष्टिकोण को रेखांकित करता है.



मई में हुई थी शुरुआत

आईएमईसी परियोजना, जिसकी चर्चा मई 2023 की शुरुआत में हुई थी, में कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव लाने, भारत-पाकिस्तान संबंधों में मौजूदा बाधाओं को दूर करने और यूरोप और फारस की खाड़ी के राज्यों के बीच रेल कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करने की परिकल्पना की गई है, जो संभवतः भविष्य में इज़राइल तक विस्तारित होगी. आईएमईसी के माध्यम से जहाज, ट्रेन मार्ग का परिचालन कई उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण आवाजाही समाधान प्रदान कर सकता है और व्यापार क्षमता को बढ़ा सकता है तथा आगे बढ़ने के लिए एक स्थायी रास्ता तैयार कर सकता है.



शिवम पटेल 



Monday, January 23, 2023

Blessing quotes

 बड़ों का बड़ा सम्मान करता हूँ,

उनसे भी खूब सम्मान पाता हूँ,

यह तो बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद है

जो मैं इतना खुश नजर आता हूँ.


प्रसन्नता से दिये आशीर्वाद से
बड़ी कोई शक्ति नहीं,
इस दुनिया में माँ-बाप की सेवा से
बड़ी कोई भक्ति नहीं।


जीवन में कुछ नहीं मिलेगा
बेवजह के वाद-विवाद से,
मुसीबत आसान हो जाती है
माता-पिता के आशीर्वाद से.


Blessing Status in Hindi


माँ-बाप के आशीर्वाद से हर मुश्किल आसान हो,
मिले सफलता और आकाश से ऊँची उड़ान हो.

जिंदगी में वो सफल होकर भी खुश ना हो सका,
क्योंकि उसने घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद नहीं लिया।

संस्कारों से जुड़ाव जड़ों का हो,
संग में आशीर्वाद हमेशा बड़ों का होगा।


Blessing Quotes 

जब भी मौका मिले
बड़े-बुजुर्गों का पैर छू लिया करो,
इनके आशीर्वाद में बड़ी
ताकत होती है.


बड़ों का दिया हुआ आशीर्वाद
और अपनों की शुभकामनाओं का
कोई रंग नहीं होता,
मगर जब यह रंग लाते हैं तो
जिंदगी में हर रंग भर जाते हैं.


आशीर्वाद और भरोसा कभी
दिखाई नहीं देते लेकिन यह
सब मिलकर असम्भव को
सम्भव बना देते हैं.


Blessing Thoughts in Hindi

जीवन को सजाओ
प्यार और विश्वास से,
जिंदगी में हर सफलता पाओ
बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से.


पुराना पेड़ फल ना दे लेकिन
वहाँ सुकून की छाया होती है,
बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद में
किस्मत बदलने वाली ताकत होती है.


आशीर्वाद शायरी

मत हो उदास बदलता है हर पल,
मेहनत कर तो बेहतर होगा कल,
ले कर माता-पिता का आशीर्वाद
अपनी मंजिल की ओर निकल।


सूरज की तरह मैं
हरदम चमकता रहा,
माँ-बाप के आशीर्वाद से
जीवन में आगे बढ़ता रहा.


आशीर्वाद स्टेटस

खींच लाता है गांव में बड़े-बूढ़ों का आशीर्वाद,
लस्सी, गुड़ के साथ बाजरे की रोटी का स्वाद।


अनमोल खजाना माँ-बाप का आशीर्वाद है,
इनकी सिखाई बातें जीवन के लिए वरदान हैं.


शिवम पटेल


Tuesday, January 17, 2023

*डगर है मुश्किल कठिन सफर है*

 डगर है मुश्किल कठिन सफर है

मगर मुसाफिर जगा नहीं है
जो सोएगा बस वही खोएगा
जो सोएगा बस वही खोएगा
ये बात उसको पता नहीं है
डगर हैं मुश्किल कठिन सफर हैं
मगर मुसाफिर जगा नहीं है।।

लगेंगे फल जब किसी वृक्ष में
वो पेड़ झुक जाएंगे स्वतः ही
अकड़ तने की बता रही है
अकड़ तने की बता रही है
अभी फल इसमें लगा नहीं है
डगर हैं मुश्किल कठिन सफर हैं
मगर मुसाफिर जगा नहीं है।।

जो खानदानी रईस होते
मिजाज रखते है नर्म अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है
तुम्हारा लहजा बता रहा है
तुम्हारी दौलत नई नई है
डगर हैं मुश्किल कठिन सफर हैं
मगर मुसाफिर जगा नहीं है।।

जरा सा कुदरत ने क्या नवाजा
की आके बैठे हो पहली शफ में
अभी से उड़ने लगे हवा में
अभी से उड़ने लगे हवा में
अभी ये शोहरत नई नई है
डगर हैं मुश्किल कठिन सफर हैं
मगर मुसाफिर जगा नहीं है।।

डगर है मुश्किल कठिन सफर है
मगर मुसाफिर जगा नहीं है
जो सोएगा बस वही खोएगा
जो सोएगा बस वही खोएगा
ये बात उसको पता नहीं है
डगर हैं मुश्किल कठिन सफर हैं
मगर मुसाफिर जगा नहीं है।।


Saturday, November 21, 2020

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) REPUBLIC DAY OF INDIA

 

   
     गणतंत्र दिवस के इस शुभ अवसर पर मैं "शिवम पटेल" सबसे पहले यहाँ पर उपस्थित आप सभी को सादर प्रणाम करता हूँ। आगे बढ़ने से पहले यह जानना आवश्यक है कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में क्यों मनाया जाता है?...
     गणतंत्र का मतलब होता है "जनता द्वारा जनता के लिए शासन"। 26 जनवरी सन 1950 को हमारा देश पूर्ण रूप से अंग्रेजों से स्वतन्त्र हो गया था क्योंकि इसी दिन भारतीय संविधान सभा की कमेटी के सदस्यों ने मिलकर अंग्रेजों के समक्ष अपना संविधान प्रस्तुत किया था। अंग्रेजों ने भारतीय नेताओं द्वारा अपना संविधान प्रस्तुत करने के लिए 3 वर्ष का समय दिया था कि यदि इतने समय के अंदर अपना संविधान प्रस्तुत कर देंगे कि कौन कौन से नियम कानून के तहत देश को चलाएंगे तो अंग्रेज भारत को पूरी तरह छोड़कर चले जाएंगे। इसको बनाने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष के रूम में डॉ भीमराव अंबेडकर जी को चुना गया। इन्होंने संविधान को अंग्रेजी भाषा में लिखने में बहुत बड़ा योगदान दिया था। इस कमेटी के सभी सदस्य अन्य देशों के संविधान से अच्छे - अच्छे विचारों और नियमों को खोज कर लाया और अपने संविधान में शामिल किया। सभी लोगों ने मिलकर इस अथक परिश्रम से 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन के अंदर भारतीय संविधान को तैयार कर लिया था और 26 जनवरी सन 1950 को भारत को मुक्त करवा लिया था। उस समय भारत के पूरे भू-भाग पर भारतीयों का हक हो गया और पूरे भारत पर भारतीय जनता को शासन करने का अधिकार प्राप्त हो गया। इसलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में पूरे हर्ष उल्लास के साथ देश भर में मनाया जाता है लेकिन इसके बावजूद भी भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में रियासतों के रूप में बंटा हुआ था जिसको बाद में "सरदार पटेल" जी ने शाम, दाम, दंड ,भेद आदि हथकंडे अपनाकर एकीकरण कर के भारत को गणराज्य बनाया और एक नये भारत का रूप दिया। इसीलिए सरदार वल्लभभाई पटेल जी को "लौह पुरुष और भारत का विस्मार्क" कहा जाता है।


   गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर मैं "शिवम पटेल" इस देश के जो नव युवा हैं उनके विचारों को कुछ पंक्तियों के माध्यम से प्रस्तुत करना चाहता हूँ जो इस प्रकार है- ध्यान से सुनियेगा और अच्छा लगे तो तालियाँ भी जरूर बजाइयेगा ---


मिल गयी अगर आज्ञा हमको
सारा इतिहास बदल देंगे
लाहौर सिंधु पेशावर और 
इस्लामाबाद भी ले लेंगे।

मौके का यही इरादा है
अब बॉर्डर क्रॉस किया जाये
आतंकावाद के अड्डों का 
अब डट कर नाश किया जाये।

बहुत हो चुका नियम उल्लंघन
बहुत हो चुका छिटपुट वार
बहुत हो चुकी शांति वार्ता
अब तो उठ जाए हथियार।

बहुत हो चुकी राजनीति 
अब बहुत हुईं बातें व्यवहार
बस एक तमन्ना है अपनी
हो जाये जंग अब आर-पार।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर
भारत माता का वंदन है
जिसका कण-कण हीरा-मोती
हर धूल यहाँ की चंदन है।

भूपति अशोक की धर्म नीति
है जन्म भूमि यह शेरों की
सम्राट हर्ष का दान यज्ञ 
इस मिट्टी का यश वर्णन है,
गणतंत्र दिवस के अवसर पर 
भारत माता का वंदन है।





    आजकल भ्रस्टाचार भारत सहित पूरे विश्व में अपना पाँव पसारे हुए है। इसपर मैं कुछ पंक्तियाँ बोल रहा हूँ --

भ्रस्ट कर्मचारी हैं जो अब
वे जनता को नोच ले रहे
अधिकारी निर्दय हो कर के
दीनो से उत्कोच ले रहे।

हो करके स्वच्छंद घूमते 
जो हैं घूसखोर अधिकारी
रिश्वतखोरी आज देश की 
है यह ला इलाज बीमारी।

क्रंदन करुण गुलाब कर रहा, कैसा है यह निज गुलिस्तां
मेरा भारत कितना महान, सौ में हैं नब्बे बेईमान।

राम राज की कल्पना मिली खाक में आज
गुंडे हैं मंत्री बने शासक हैं यमराज
शासक हैं यमराज राज करते हैं दानव
क्रन्दन करुण कर रहे पीड़ित होकर मानव
कहते "शिवम पटेल" समस्या यही आज की
करें कल्पना कैसे हम सब राम राज की।




भारत के गणतंत्र का सारे जग में मान
दशकों से है खिल रही इसकी अद्भुत शान
सब धर्मों को देकर मान रचा गया इतिहास
इसी लिए हर देशवासी का इसमें है विश्वास।


      

     अब अन्त में चलते चलते भारत माँ के उन वीर सपूतों, नौ जवानों और सुरक्षा कर्मियों के सम्मान में कुछ सुनाते चलें जो देश और देश के लोगों की सेवा कर रहे है और सेवा करते करते शहीद भी हो जाते हैं। ध्यान से सुनियेगा -----


किसी ने क्या खूब कहा है --

किसी महफ़िल की खुशबू को महकता छोड़ आया हूँ
मेरी नन्ही सी चिड़िया को चहकता छोड़ आया हूँ
मुझे छाती से अपनी तू  लगा लेना ऐ भारत माँ
मैं अपनी माँ की बाहों को तरशता छोड़ आया हूँ।

लड़े जंग वीरों की तरह 
जब खून खौल फौलाद हुआ
मरते दम तक डटे रहे वो
तभी तो देश आजाद हुआ।


कुछ नशा तिरंगे की आन का है
कुछ नशा तिरंगे की शान का है
हम लहरायेंगे हर जगह यह तिरंगा
नशा ये हिंदुस्तान के सम्मान का है।


भारत माता तेरी गाथा
सबसे ऊँची तेरी शान
तेरे आगे शीश झुकायें
दें तुझको हम सब सम्मान।

      "जय हिन्द"





शिवम पटेल
ग्राम- ताजपुर
पोस्ट- रामपुर सकरवारी
जिला/जनपद- अम्बेडकर नगर
उत्तर प्रदेश, भारत
पिन कोड - 224122

Sunday, October 4, 2020

क्या आप ऐसे जीव के बारे में जानते हैं जो कभी न मरता हो।

क्या आप दुनिया के ऐसे जानवर के बारे में बता सकते हैं जो कभी नहीं मरता है : आपने धरती पर रहने वाले कई जीवों के बारे में सुना होगा, पढ़ा होगा यहां तक की देखा भी होगा। हमारी दुनिया इतनी बड़ी है कि यहां हर तरह के जीव-जंतु पाए जाते हैं, जिनके बारे में इतनी हैरानी होती हैं कि क्या ये इस घरती के रहने वाले जीव-जंतु हैं या कहीं बाहर से आए हैं, फिर चाहे वो पानी के अंदर की दुनिया के हों।

क्या आप दुनिया के ऐसे जानवर के बारे में बता सकते हैं जो कभी नहीं मरता है।

General Knowledge क्या आप दुनिया के ऐसे जानवर के बारे में बता सकते हैं जो कभी नहीं मरता है                                    Water bear insect. 
आपने इंसानों की अमरता के बारे में सुना होगा। इसका कई जगह उल्लेख भी है। कैसे राक्षस खुद को अपर रखने के लिए छल कपट किया करते थे या धरती पर कोई ऐसी जड़ी बूटी पाई गई हैं जिससे खाकर इंसान अमर होता है। ऐसी ही बेहद से बातें जो सुनने के बाद भी यकनी होता की ऐसा भी होता होगा। खैर, जब हमकों इंसानों के अमर होने पर इतना शक है तो किसी जीव-जंतु के अमर होने पर क्या कहेंगे, कोई एक जानवर या छोटा सा कीड़ा जो कभी मर ही नहीं सकता। चाहें उसके साथ आप कुछ भी कर लो लेकिन वो अमर है।

नहीं मरता ये जीव : 

हो गए न आप भी हैरान, लेकिन ये सच हैं कि हमारी धरती पर एक ऐसा जीव है जो धरती का नहीं है लेकिन उसकी जिंदगी कभी खत्म नहीं होती। जी हां, आज हम आपको एक ऐसे ही कीड़े के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपको हैरान करके रख देगा। वो कीड़ा धरती का नहीं है अंतरिक्ष का है और वो अमर है यानी कभी भी, कुछ भी करने पर मर नहीं सकता। आज हम आपको इस कीडे के बारे में हैरान कर देने वाली जानकारी बताने जा रहे हैं, क्योंकि ये एक ऐसा जीव है जो कभी नहीं मरता नहीं, जिसको आप अमर कह सकते हैं। चलिए तो फिर बिना देरी किए आपको इसके बारे में बताते हैं कि उस कीड़े का क्या नाम है जिसको अमरता का वरदान मिला हुआ है।

ardigrade है इस जीव का नाम 

दरअसल, इस कीड़े को वॉटर बियर (Water bear) या टार्डीग्रेड (Tardigrade) यानी धीरे-धीरे चलने वाला कीड़ा कहा जाता है। इस कीड़े का नाम पूरी दुनिया में ऐसा जीव घोषित किया गया है जो कभी मर नहीं सकता। इस कीड़े के बारे में तब पता चला जब एक स्पेस शटल (Space shuttle) चांद पर क्रश हो गया और काफी पैसों का नुकसान हुआ था। साथ में काफी चीजें भी तबाह हो गई थी, लेकिन जिन चीजों के अवशेष मिले थे। उन पर यह कीड़े भारी मात्रा में पाए गए थे। यह खबर पूरी दुनिया में फैल गई थी कि स्पेस में एलियन की खोज मिल गई है, लेकिन जांच पर पता लगा यह जीव तो पृथ्वी से ही आए हैं और केवल पृथ्वी पर ही नहीं यह जी किसी भी प्लेनेट पर जिंदा रह सकते हैं।

मरता का वरदना माना जाता है इसको

है ना हैरान कर देने वाली बात, इतना ही नहीं आप इन्हें मारने के लिए चाहे इसको काट दीजिए, कुचल दीजिए, पानी में उबाल दीजिए, ठंडा कर दीजिए, जो-जो तरीका आप अपना सकते हैं अपना कर देख लीजिए लेकिन ये कीड़ा कब भी नहीं मरेगा और अगर इसको कुछ नुकसान भी पहुचता है तो यह अपने आप को जिंदा कर लेते हैं और खुद को रिपेयर भी कर लेेता है।